मंदसौर

नपाध्यक्ष के लिए पर्यवेक्षक ने जानी पार्षदों की राय, एक सप्ताह में हो सकता है निर्णय

नपाध्यक्ष के लिए पर्यवेक्षक ने जानी पार्षदों की राय, एक सप्ताह में हो सकता है निर्णय

नगर पालिका में कार्यकारी अध्यक्ष को लेकर कांग्रेस में एक बार फिर से कवायद शुरु हो गई है। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के पहले नेताओं ने खूब जोर लगाया, लेकिन आपसी खींचतान में निर्णय नहीं हो पाया। अब अध्यक्ष की कुर्सी खाली हुए 6माह बीत गए तो उम्मीद जताई जा रही है कि उपचुनाव होंगे। लेकिन कांग्रेस खेमें में फिर से अध्यक्ष को लेकर पहल शुरु हुई। इसके लिए पीसीसी द्वारा भेजे गए पर्यवेक्षक प्रभुसिंह ठाकुर मंगलवार को मंदसौर पहुंचे और कांग्रेस पार्षदों से अध्यक्ष को लेकर रायशुमारी की। पहले चरण में बंद कमरेें में बारी-बारी से अध्यक्ष को लेकर सभी पार्षदों से चर्चा की। इसमें अध्यक्ष के लिए उनकी राय जानने के साथ उन्हें बनाने की वजह भी उनसे पूछी। इसके बाद संगठन के नेताओं से भी उन्होंने बात की। सभी से व्यक्तिगत रुप से बात करने के बाद उन्होंने बैठक को संबोधित किया। सुबह से शाम तक रायशुमारी का यह दौर चलता रहा और सभी से विस्तृत रुप से बात की गई।

पार्षद बोले रिपोर्ट सिर्फ सीएम को ही बताना
जानकारी के अनुसार पर्यवेक्षक से चर्चा के दौरान अधिकांश पार्षदों ने कहा कि यहां से जो रिपोर्ट आप तैयार कर रहे हो। वह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व सीएम कमलनाथ को ही बताना। इसके अलावा पीसीसी या पार्टी के भोपाल के भी किसी अन्य नेता को नहीं। वहां के नेताओं के यहां के स्थानीय कांग्रेस नेताओं से संबंध है। ऐसे में वह इन्हें बता देते और रिपोर्ट ओपन होते ही गुटबाजी शुरु हो जाती है। पहले भी ऐसा ही हुआ था। लोकसभा चुनाव के पहले भी अध्यक्ष को लेकर पार्षदों से रायमशवरा करने पीसीसी से पर्यवेक्षक के रुप में मनोहर बैरागी आए थे। उन्होंने रिपोर्ट ओपन कर दी थी। इसलिए पहले मामला बिगड़ गया था और अध्यक्ष में रोक लग गई।

संगठन ने बैठक का सौंपा पत्र
पिछले दिनों जिलाध्यक्ष की मौजूदगी में सभी पार्षदों ने बैठक की थी। इसमें यह तय हुआ था कि संगठन किसी पर भी निर्णय करें सभी सहमत होंगे। पार्षदों की सहमति वाला पत्र भी पर्यवेक्षक को सौंपा। यह भी बताया जा रहा है कि एक सप्ताह में अध्यक्ष को लेकर निर्णय हो सकता है। लंबे समय बाद फिर से कवायद शुरु हुई है।

पार्षदों को पता ही नहीं था, कार्यालय पहुंचने पर बताया
रायशुमारी के दौरान कई पार्षद नाराज भी नजर आए। इसके पीछे यह वजह बताई गई कि पर्यवेक्षक बनकर आए पूर्व मंत्री के आने की सूचना थी, लेकिन पर्यवेक्षक और नपाध्यक्ष को लेकर रायशुमारी करने आ रहे। यह तो कार्यालय पहुंचने के बाद पता चला। जानकारी नहीं होने की बात को लेकर कई ने नाराजगी जताई।

17 पार्षदों ने अध्यक्ष के लिए इन नामों को किया आगे
जानकारी के अनुसार कांग्रेस के वर्तमान में 17 पार्षद है। इनमें से सभी से अलग-अलग चर्चा की। इसमें से 5 पार्षदों के नाम अध्यक्ष के लिए आगे बढ़ाते हुए पार्षदों ने इन्हें बनाने की बात कही। वहीं नाम है जो पहले भी इसके लिए दावेदार थे। इनमें से डिगपालसिंह भाटी, शाकिरा खेड़ीवाला, विजय गुर्जर, हनीफ शेख, रुपल संचेती के नाम प्रमुख है। पूर्व में भी रुपल संचेती, हनीफ शेख और शाकिरा खेड़ीवाला के बीच मामला उलझने के कारण निर्णय नहीं हो पाया था।